⭐ Sabse Important Points · एक नज़र में
- उदारवादी युग (1885–1905): कांग्रेस की स्थापना ए.ओ. ह्यूम द्वारा; मुख्य मांगें—संवैधानिक सुधार, भारतीयों की नियुक्ति, आर्थिक नीतियों की आलोचना।
- असहयोग आंदोलन (1920–22): खिलाफत आंदोलन के साथ गठजोड़; स्कूल, अदालत और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार; चौरी-चौरा कांड (1922) के बाद स्थगित।
- स्वदेशी आंदोलन (1905): बंगाल विभाजन के विरोध में; लाल-बाल-पाल की त्रयी; विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं का प्रचार।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930): दांडी मार्च (12 मार्च 1930) से शुरू; नमक कानून तोड़ा; गांधी-इरविन समझौता (1931) के बाद आंदोलन स्थगित।
- गांधीवादी युग (1919–1947): असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलन; सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांत।
- भारत छोड़ो आंदोलन (1942): 'करो या मरो' का नारा; कांग्रेस नेता गिरफ्तार; जनता ने स्वतः स्फूर्ति से भाग लिया।
Introduction · परिचय
यह टॉपिक UPPSC प्रारंभिक परीक्षा के सामान्य अध्ययन-I में भारत के इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन से संबंधित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक भारत के प्रमुख घटनाक्रम, व्यक्तित्व, आंदोलन और प्रशासनिक व्यवस्थाएँ शामिल हैं। संक्षिप्त पुनरावृत्ति नोट्स के रूप में यहाँ दो प्रमुख खंड दिए गए हैं: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का क्रमिक विकास और स्वतंत्रता संग्राम में गांधीवादी युग।
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का क्रमिक विकास (1885–1947)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई और इसने उदारवादी से उग्रवादी, फिर गांधीवादी और अंततः स्वतंत्रता प्राप्ति तक की यात्रा की। प्रमुख चरण: उदारवादी युग (1885–1905), स्वदेशी आंदोलन (1905–1911), होम रूल आंदोलन (1916), असहयोग आंदोलन (1920–22), सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930–34), भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और स्वतंत्रता (1947)।
- कांग्रेस की स्थापना (1885)
- बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन (1905)
- होम रूल आंदोलन (1916)
- असहयोग आंदोलन (1920)
- सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930)
- भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
- स्वतंत्रता (1947)
⭐ Key Points · याद रखने वाली बातें
- उदारवादी युग (1885–1905): कांग्रेस की स्थापना ए.ओ. ह्यूम द्वारा; मुख्य मांगें—संवैधानिक सुधार, भारतीयों की नियुक्ति, आर्थिक नीतियों की आलोचना।
- स्वदेशी आंदोलन (1905): बंगाल विभाजन के विरोध में; लाल-बाल-पाल की त्रयी; विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं का प्रचार।
- गांधीवादी युग (1919–1947): असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलन; सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांत।
✍️ Solved Example 1 · हल किया हुआ उदाहरण
❓ Question: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कब और किसके द्वारा हुई?
✅ Solution: 1885 में ए.ओ. ह्यूम द्वारा।
💡 Explanation: कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को बॉम्बे में हुई; पहले अध्यक्ष डब्ल्यू.सी. बनर्जी थे।
गांधीवादी युग और प्रमुख आंदोलन
महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम ने जनआंदोलन का रूप लिया। असहयोग आंदोलन (1920–22) में चौरी-चौरा कांड के बाद आंदोलन वापस लिया गया। सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) की शुरुआत दांडी मार्च से हुई। भारत छोड़ो आंदोलन (1942) में 'करो या मरो' का नारा दिया गया।
| आंदोलन | वर्ष | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| असहयोग आंदोलन | 1920–22 | बहिष्कार और खिलाफत |
| सविनय अवज्ञा आंदोलन | 1930–34 | नमक कानून तोड़ा |
| भारत छोड़ो आंदोलन | 1942 | 'करो या मरो' |
⭐ Key Points · याद रखने वाली बातें
- असहयोग आंदोलन (1920–22): खिलाफत आंदोलन के साथ गठजोड़; स्कूल, अदालत और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार; चौरी-चौरा कांड (1922) के बाद स्थगित।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930): दांडी मार्च (12 मार्च 1930) से शुरू; नमक कानून तोड़ा; गांधी-इरविन समझौता (1931) के बाद आंदोलन स्थगित।
- भारत छोड़ो आंदोलन (1942): 'करो या मरो' का नारा; कांग्रेस नेता गिरफ्तार; जनता ने स्वतः स्फूर्ति से भाग लिया।
✍️ Solved Example 1 · हल किया हुआ उदाहरण
❓ Question: दांडी मार्च कब और कहाँ से शुरू हुआ?
✅ Solution: 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से।
💡 Explanation: गांधीजी ने 24 दिनों में 240 मील की यात्रा कर 6 अप्रैल 1930 को दांडी में नमक कानून तोड़ा।
Practice Questions · खुद हल करके देखो
पहले खुद try karo, phir “Answer dekho” dabakar check karo. 👇
Q1भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?
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✅ Answer: डब्ल्यू.सी. बनर्जी
💡 Explanation: 1885 में कांग्रेस की स्थापना के समय प्रथम अध्यक्ष डब्ल्यू.सी. बनर्जी चुने गए थे।
Q2चौरी-चौरा कांड किस वर्ष हुआ और इसका असहयोग आंदोलन पर क्या प्रभाव पड़ा?
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✅ Answer: 1922 में; गांधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।
💡 Explanation: चौरी-चौरा में हिंसा के बाद गांधीजी ने आंदोलन स्थगित कर दिया क्योंकि वे अहिंसा के पक्षधर थे।
Q3दांडी मार्च का उद्देश्य क्या था?
👀 Answer dekho
✅ Answer: नमक कानून तोड़ना।
💡 Explanation: ब्रिटिश सरकार के नमक कर के विरोध में गांधीजी ने दांडी में नमक बनाकर कानून तोड़ा, जिससे सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हुआ।
⚠️ Common Mistakes · ये गलतियाँ बिल्कुल मत करना
- गलती: असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन के वर्षों को मिलाना। बचाव: असहयोग (1920–22) और सविनय अवज्ञा (1930–34) को अलग-अलग याद करें।
- गलती: भारत छोड़ो आंदोलन का नारा 'करो या मरो' को गलत व्यक्ति से जोड़ना। बचाव: यह नारा गांधीजी ने दिया था, इसे याद रखें।
⚡ Quick Revision · Exam से पहले 2 मिनट में दोहराओ
- कांग्रेस स्थापना: 1885, ए.ओ. ह्यूम, प्रथम अध्यक्ष डब्ल्यू.सी. बनर्जी।
- बंगाल विभाजन: 1905, स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत।
- दांडी मार्च: 12 मार्च 1930, सविनय अवज्ञा आंदोलन।
- भारत छोड़ो आंदोलन: 1942, 'करो या मरो'।