Introduction
आर्थिक परिदृश्य (Economic Scene) SSC CGL सामान्य जागरूकता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें भारतीय अर्थव्यवस्था की मूल अवधारणाएँ, क्षेत्र, नीतियाँ, बजट, कराधान, मुद्रास्फीति, बेरोजगारी, गरीबी, जनगणना, आर्थिक सर्वेक्षण, पंचवर्षीय योजनाएँ, बैंकिंग, GDP, GNP, NNP आदि सम्मिलित हैं। यह टॉपिक स्टेटिक और करेंट दोनों प्रकार के प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय आय की अवधारणाएँ
राष्ट्रीय आय किसी देश के नागरिकों द्वारा एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य है। GDP (सकल घरेलू उत्पाद) देश की भौगोलिक सीमा के भीतर उत्पादन है, जबकि GNP (सकल राष्ट्रीय उत्पाद) में विदेशों से शुद्ध साधन आय जोड़ी जाती है। NNP = GNP – मूल्यह्रास। NNP को साधन लागत पर प्राप्त करने के लिए अप्रत्यक्ष कर घटाएँ और सब्सिडी जोड़ें। प्रति व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय / जनसंख्या।
Key Points
- GDP = C + I + G + (X – M), जहाँ C उपभोग, I निवेश, G सरकारी व्यय, X निर्यात, M आयात।
- GNP = GDP + विदेशों से शुद्ध साधन आय (NFIA)।
- NNP = GNP – मूल्यह्रास।
- प्रति व्यक्ति आय जीवन स्तर का सूचक है, लेकिन वितरण की असमानता नहीं दर्शाती।
Solved Example 1
Question: यदि GDP = 1000 करोड़, NFIA = 50 करोड़, मूल्यह्रास = 100 करोड़, तो NNP ज्ञात करें।
Solution: NNP = 950 करोड़
Explanation: GNP = GDP + NFIA = 1000 + 50 = 1050 करोड़। NNP = GNP – मूल्यह्रास = 1050 – 100 = 950 करोड़।
मुद्रास्फीति, बेरोजगारी और गरीबी
मुद्रास्फीति सामान्य कीमत स्तर में वृद्धि है, जो पैसे की क्रय शक्ति घटाती है। मांग-जनित और लागत-जनित मुद्रास्फीति मुख्य प्रकार हैं। बेरोजगारी के प्रकार: संरचनात्मक, चक्रीय, घर्षणात्मक, मौसमी। गरीबी रेखा नीति आयोग (पूर्व में योजना आयोग) द्वारा निर्धारित की जाती है; वर्तमान में बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) का उपयोग होता है।
Key Points
- मुद्रास्फीति दर = (वर्तमान वर्ष CPI – पिछले वर्ष CPI) / पिछले वर्ष CPI × 100।
- बेरोजगारी दर = (बेरोजगार श्रमिक / कुल श्रम बल) × 100।
- गरीबी रेखा से नीचे जनसंख्या का अनुपात गरीबी अनुपात है।
- महंगाई नियंत्रण हेतु RBI मौद्रिक नीति का उपयोग करता है।
Solved Example 1
Question: यदि 2022 में CPI 120 और 2023 में 132 है, तो मुद्रास्फीति दर क्या है?
Solution: 10%
Explanation: मुद्रास्फीति दर = (132 – 120)/120 × 100 = 12/120 × 100 = 10%।
बजट, कराधान और राजकोषीय नीति
केंद्रीय बजट वार्षिक वित्तीय विवरण है जो सरकार की आय और व्यय दर्शाता है। राजस्व प्राप्तियाँ कर और गैर-कर राजस्व से आती हैं। पूंजीगत प्राप्तियाँ उधार और विनिवेश से। राजकोषीय घाटा = कुल व्यय – कुल प्राप्तियाँ (उधार को छोड़कर)। प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा – ब्याज भुगतान। कर दो प्रकार: प्रत्यक्ष (आयकर, निगम कर) और अप्रत्यक्ष (GST, सीमा शुल्क)।
Key Points
- राजस्व घाटा = राजस्व व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ।
- राजकोषीय घाटा = कुल व्यय – कुल प्राप्तियाँ (उधार को छोड़कर)।
- GST अप्रत्यक्ष कर है, जो 2017 में लागू हुआ।
- राजकोषीय नीति सरकार द्वारा, मौद्रिक नीति RBI द्वारा संचालित।
Solved Example 1
Question: यदि कुल व्यय = 5000 करोड़, राजस्व प्राप्तियाँ = 3000 करोड़, पूंजीगत प्राप्तियाँ (उधार को छोड़कर) = 500 करोड़, तो राजकोषीय घाटा?
Solution: 1500 करोड़
Explanation: कुल प्राप्तियाँ (उधार को छोड़कर) = 3000 + 500 = 3500 करोड़। राजकोषीय घाटा = 5000 – 3500 = 1500 करोड़।
Practice Questions
Q1. भारत में राष्ट्रीय आय की गणना कौन करता है?
Answer: केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO), अब राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO)
Explanation: CSO (अब NSO) राष्ट्रीय आय, GDP, GNP आदि के आँकड़े जारी करता है।
Q2. मुद्रास्फीति के समय RBI आमतौर पर क्या करता है?
Answer: रेपो दर बढ़ाता है
Explanation: रेपो दर बढ़ाने से उधार महंगा होता है, मांग घटती है और मुद्रास्फीति नियंत्रित होती है।
Q3. राजकोषीय घाटा और प्राथमिक घाटा में क्या संबंध है?
Answer: प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा – ब्याज भुगतान
Explanation: प्राथमिक घाटा सरकार की उधार लेने की आवश्यकता को दर्शाता है, ब्याज भुगतान को हटाकर।
Common Mistakes
- GDP और GNP को एक ही समझना: GDP भौगोलिक सीमा, GNP राष्ट्रीयता पर आधारित है।
- मुद्रास्फीति और मंदी को उलटा समझना: मुद्रास्फीति में कीमतें बढ़ती हैं, मंदी में घटती हैं।
- राजकोषीय घाटा में उधार को शामिल करना: राजकोषीय घाटा = कुल व्यय – कुल प्राप्तियाँ (उधार को छोड़कर)।
Quick Revision
- GDP = C + I + G + (X – M); GNP = GDP + NFIA; NNP = GNP – मूल्यह्रास।
- मुद्रास्फीति दर = (CPI वर्तमान – CPI पिछला)/CPI पिछला × 100।
- राजकोषीय घाटा = कुल व्यय – कुल प्राप्तियाँ (उधार को छोड़कर); प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा – ब्याज भुगतान।